![]() |
About those who just think about themselves |
पैसे और मान में इस घोर कलयुग में कितने धोखे देखे हैं ज्ञान अच्छा बनने का देते खुद चोरी करके बैठे हैं | कितना भी शक हो मन में भावों में बह जाते हैं दिखावटी आचरण को देख हम खुद को समझाते हैं | लगता वो प्रतिबिम्ब हैं मेरे हर बार यूँ चूक जाते हैं हर मतलबी चाल में वो अच्छा ही दिखलाते हैं | कुछ पैसे और मान में वो इतने अंधे हो जाते हैं जिसका खाया, जिससे पाया फिर भी अपनी बजाते हैं | माना खुश होंगे इस सब से कितनों का दिल दुखाते हैं इन्हीं कारणों के चलते सबके मन से दूर हो जाते हैं | अब भी अगर नहीं सुधरे कब तक दूकान चलाओगे एक दिन वो ऐसा आएगा जब पाई-पाई का हिसाब चुकाओगे । |