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Sometimes when you miss your mother. |
थक गया हूँ कितना वक्त बीत गया कुछ लिखना था मुझे थक गया हूँ चलते-चलते कहीं रुकना था मुझे शायद में भूल गया या में इतना डूब गया अपने सपनों में, अपनी जिम्मेदारियों में माँ की आकांक्षाओं में, दोस्ती-यारियों में पता नहीं, पर… जब सोता हूँ, जब खाता हूँ जब रोता हूँ, जब खुद को अकेला पता हूँ तब तुम्हारी बहुत याद आती है माँ कितना वक्त बीत गया तुमसे मिलना था मुझे कुछ सुनाना था, कुछ सुनना था तुम्हारी गोद में सर रखकर सोना था मुझे भाव-भीन होना था मुझे थक गया हूँ चलते-चलते ।। |