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About office and our colleagues |
ऑफिस की बातें फिर एक रात बीत गई फिर नया दिन मुकर जाएगा क्षणभंगुर सा ये जीवन हमारा लगता ऑफिस में ही गुजर जाएगा काम-काम और meetings में Birthday और last-day greetings में फ़ोन की घंटी and call transfer ऑफिस के rules & regulations जानकार अब तो माथा सटक गया है ऑफिस से मन भटक गया है कैसे समझूँ और समझाऊं या इनको जीवन का सार बतलाऊँ खैर छोडो ये दर्शनशास्त्र की बातें चलो सुनें कुछ ऑफिस की बातें दिन प्रतिदिन बढ़ी है जिम्मेदारी फिर भी workshop की है तैयारी Hard-work और team efforts में सबसे आगे सोनल हमारी काम यहाँ सब मन से करते हैं कुछ नेहा के डर से डरते हैं शिवानी का तो जवाब नहीं Fashion के आगे duty का सवाल ही नहीं बंकर बेचारे LIGO बंकर में पड़े हैं दृढ़ निश्चय कर अकेले ही खड़े हैं पर जब भी वो ऑफिस हैं आते Headphone लगा कर पता नहीं कहाँ खो जाते किस-किस की मैं गाथा गाऊं इतने शब्द कहाँ से लाऊँ अगले लेखन में बांकी सब बतलाऊगा जब फिर से ऑफिस मैं ध्यान मगन हो जाउगा पर… खुद की कुछ कहना चाहता हूँ चार पंक्ति और पढ़ना चाहता हूँ कि… क्या-क्या सोचा था बचपन में बनूँगा Astronaut इस जीवन मैं रास्ते-मंजिल सब पृथक हो रहे हैं जीवन के घंटे तेजी से कम हो रहे हैं ।। |