तुम मेरी आवाज़ बनो जब मै खामोश रहूँ तुम मेरी मुस्कान बनो जब मै परेशान रहूँ तुम मेरा आयना बनो जब कभी गलती करुँ तुम मेरी रयना बनो जब कभी बोल न पाऊं तुम मेरा जिक्र बनो जब दूर कहीं चला जाऊं तुम मेरी फिक्र बनो जब कहीं मै खो जाऊं तुम मेरे कदम बनो जब चलते-चलते थक जाऊं तुम मेरे हम-दम बनो जब कहीं भटक जाऊं तुम मेरी आस बनो जब कोई साथी न हो तुम मेरा अहसास बनो जब कोई अहसास बाकी न हो तुम मेरी जीत बनो जब सब कुछ हार जाऊं तुम मेरा गीत बनो जब किसी महफ़िल में गाऊं तुम्हें याद कर, मेरे मन की कलम जब भी रुके तब तुम मेरे ख्वाबों की लिखाबट बनो.......... |