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this poem is about the feelings of a lover. |
| आशिक दिल के गहराईयों में दीप प्रज्वलित हो गया धड़कने जो थम गयीं थी बेकरार अब हो गयी नैंनो से नैन मिले तो घायल आशिक हो गया होश में बेहोश होकर यूं उसी का हो गया प्यार था जो भी दिल में निछावर उस पर कर दिया आँखों में तस्वीर भर के प्यासा उसका हो गया उसको ख्यालों में लाकर मन पुल्कित हो गया खिल गयें लालच के कमल उसपर डेरा हो गया रात में नीद न आयी याद में उसके खो गया सोचते ही सोचते ही कल का सवेरा हो गया |