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this poem is about my college life. |
| College life क्लाश का पहला दिन था उनसे हमारी मुलाकात हुयी हम तो तभी समझ गये अब तो हमारी पढ़ाई बरबाद हुयी हम बहुत कोशिश किये फिर फेसबुक पर बात हुयी हम खुद को इतना जलाते जब भी किसी से उनकी बात हुयी हम फेसबुक इतना चलायेंगे ऐसी ना कभी अवकात हुयी नेटचार्ज थे इतना आते जेब पैसे से लाचार हुयी हम कविता उनके लिये लिखते आखिर वो इन पर फिदा हुयी हम अपनी लेखनी को समझें अब किसी के काबिल हुयी हम तो थे हनुमान के चेले पर कामदेव से कैसे हार हुयी हम खुद को सान्त्वना देते इस हार से वो मेरी यार हुयी |