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A poem about me |
| उनके आलिंगन में कभी हमारी मुस्कान उनके आलिंगन में खेला करती थी कभी हमारी नटखट सी बातें उस घर में फैला करती थीं कभी उदास हमारा मन हो जाता जिसे देख उनका धैयॆ खो जाता तब उनकी वो बातें हमारा धैयॆ बंधाया करती थीँ कभी हमारी मुस्कान......... उनका समझाना और हामारा समझना एक आदत सी बन गई थी कभी उनकी जिन्दगी का हर पहलू हमारा आइना बन गई थी कभी नाराज हुआ जब उनसे कभी मनाया जब सबने मिल के कभी हमारी नादानी उनको परेशान किया करती थी कभी हमारी मुस्कान......... जब दूर हुआ मै उनसे लगा कि दूर हुआ मै खुद से कभी उन्हें परेशान देख आखें भर आया करती थीँ कभी हमारी मुस्कान......... |