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a ghazal by anandkrishna |
| एक रचना भेज रहा हूँ. पसंद आये तो बताएं, ना पसंद आये तो ज़रूर बताएं......... एक ग़ज़ल : "रोक पाएंगीं क्या ........." रोक पाएंगीं क्या सलाखें दो-? जब तलक हैं य' मेरी पांखें दो । जिसने सबको दवा-ए-दर्द दिया- आज वो माँगता है- साँसें दो । चाह कर भी निकल नहीं सकता- मुझको घेरे हुए हैं बाँहें दो । वो इबादत हो या की पूजा हो- एक मंजिल है और राहें दो । मुझको कोई बचा नहीं पाया- मेरी कातिल- तुम्हारी आँखें दो । या तो आंसू मिलें, या तन्हाई- एक जुर्म की नहीं सजाएं दो । * * * * * * * * * सादर- आनंदकृष्ण, जबलपुर मोबाइल : 09425800818 http://www.hindi- nikash.blogspot. com |